अजमेर व उसके आस-पास के किसान लोग रैगरों के घृणित काम बन्द करने के कारण काफी जले हुये थे । उन्होंने गुप्त मिटिंग करके रैगरों पर सामूहिक हमले की योजना बनाई । निश्चित तिथि पर एक ही दिन हरमाड़ा सराधना श्रीनगर गोविन्दगढ़ आदि सभी 210 गाँवों पर एक साथ हमला हुआ । रैगरों को मारा-पीटा, घर मकान तोड़ दिये व जला दिये गये कूओं को कचरे से भर दिया गया । फसल नष्ट कर दी गई व चमड़े के कारखानों को तोड़ दिया गया और भी बहुत नुकसान हो गया ।
सामूहिक आक्रमण के कारण पूरे अजमेर राज्य में त्राहि-त्राहि मच गई । श्री नोगिया जी ने अजमेर राज्य व भारत सरकार से सुरक्षा व शान्ति व्यवस्था कायम करने हेतु कार्यवाही की । तो अजमेर पुलिस ने स्वर्णों व किसानों के कहने पर श्री नोगिया एवं उनकी सभा के कार्यकर्ताओं पर ही अशान्ति फैलाने का आरोप लगाया और सी.आई.डी. जाँच चालू करा दी व कुछ लोगों को बन्द भी कर दिया । फिर श्री नोगिया जी व उनके साथी (श्री रूपचन्द जलुथरिया) बाबा साहेब डाक्टर भीमराव अम्बेडकर के पास गये । उन्होंने इनकी पूरी बात सुनकर सहायता की और भारत सरकार के गृह विभाग से रैगर समाज की सुरक्षा व पूर्ण शान्ति व्यवस्था कायम करने के आदेश भिजवाये जिसका तत्काल पालन किया गया और तब शान्ति कायम हुई ।
(साभार- रूपचन्द जलुथरिया कृत ‘रैगर जाति का इतिहास’)
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