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Ministor

      सम्‍पूर्ण भारत में रैगरों की जनसंख्‍या 50 लाख है । इतनी जनसंख्‍या होने के बावजूद भी 1981 से पहले रैगरों को सम्‍पूर्ण भारत में कहीं भी मंत्री मण्‍डल में प्रतिनिधित्‍व नहीं दिया गया । पहली बार 1981 में राजस्‍थान में मंत्री मण्‍डल में रैगरों को प्रतिनिधित्‍व मिला । श्री शिवचरण माथुर के मंत्री मण्‍डल में श्री छोगालाल कंवरिया को केबिनेट मंत्री के रूप में नियुक्‍त किया गया । इनको चिकित्‍सा एवम् स्‍वास्‍थ्‍य जैसा महत्‍वपूर्ण विभाग सौंपा गया । ये जब तक मंत्री पद पर रहे इन्‍होंने विभाग को बहुत ही कुशलता से चलाया । श्री छोगालाल कंवरिया के मंत्री मण्‍डल से हटने के बाद श्री छोगाराम बाकोलिया को राजस्‍थान के मंत्री मण्‍डल में सम्मिलित किया गया । श्री सुरेन्‍द्रपाल रातावाल सन् 1993 में दिल्‍ली विधान सभा के सदस्‍य चुने गए और भाजपा मंत्रीमण्‍डल में केबीनेट मंत्री बनाये गये । उन्‍हें श्रम, पर्यटन एवं अनु‍सूचित जाति जनजाति कल्‍याण विभाग दिया गया । श्री सुरेन्‍द्रपाल रतावाल रेगर समाज के पहले व्‍यक्ति हैं जो दिल्‍ली विधान सभा में केबीनेट मंत्री रहे हैं ।

श्री छोगाराम बाकोलिया

Chogaram Bakoliya

      आपका जन्‍म श्री जयराम बाकोलिया निवासी बाड़मेर के घर 1 जनवरी, 1944 में हुआ । आपने पोलोटेक्निक जोधपुर से मैकेनिक इंजिनियरिंग में डिप्‍लोमा किया । 1965-76 तक कनिष्‍ट अभियन्‍ता राजस्‍थान राज्‍य विद्युत मण्‍डल में नियुक्‍त रहे । पदोन्‍नत होकर 1976 से मई 1980 तक आपने सहायक अभियन्‍ता के पद पर कार्य किया । 1980 में स्‍वैच्‍छा से सहायक अभियन्‍ता के पद से त्‍याग पत्र देकर कांग्रेस (ई) के के सदस्‍य बन गये और रेवदर (सिरोही) से विधानसभा का चुनाव जीत कर प्रथम बार विधायक बने । आप 1981 में राज्‍य नियोजन सलाहकार समिति के सदस्‍य रहे तथा राजस्‍थान हाथ करघा परियोजना मण्‍डल के अध्‍यक्ष रहे । अखिल भारतीय अनुसूचित जाति परिष्‍द् की राजस्‍थान शाखा के सचिव तथा निदेशक मण्‍डल राजस्‍थान राज्‍य पथ परिवहन निगम एवम् बोर्ड ऑफ डायरेक्‍टर राजस्‍थान अनुसूचित विकास मण्‍डल के सदस्‍य रहे । सिरोही जिला शाखा के उपाध्‍यक्ष रहे । खाद्य एवम् कृषि संगठन के विशिष्‍ठ कार्यक्रम के अन्‍तर्गत सियोज (दक्षिण) कोरिया, टोकियो, ओसाका (जापान), हांगकांग, बैंकाक (थाईलैण्‍ड), सिंगापुर आदि देशों में आपको भारत सरकार द्वारा भेजा गया । 1981-82 में आप अनुसूचित जाति कल्‍याण समिति के सदस्‍य रहे । सिंचाई, जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियांत्रिकी, राजस्‍व एवम् भूमि सुधार, ऊर्जा, बाढ़ एवम् अकाल राहत विभागों की संसदीय परामर्शदात्री समिति के आप सदस्‍य रहे । 16-10-1982 से 1985 तक आप ऊर्जा, समाज कल्‍याण एवम् भू-जल विभाग के उपमंत्री रहे । 1985 में रेवदर (सिरोही) से आप दौबारा विधान सभा सदस्‍य चनु कर आए । 11-03-1985 से 15-10-1985 तक आप राज्‍य मंत्री रहे तथा 16-10-1985 से आपको केबीनेट मंत्री बनाया गया । आपको खाद्य एवम् आपूर्ति विभाग सौंपा गया । वर्ष 1998 में ग्‍यारवीं विधान सभा में आप रेवदर (सिरो‍ही) से तीसरी बार विधान सभा सदस्‍य चुने गए । मुख्‍यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने अपने मंत्रीमण्‍डल में आपको केबीनेट मंत्री के रूप में सामिल किया और यातायत विभाग की जिम्‍मेदारी सौंपी । आपको जो भी विभाग सौंपा गया उसको कुशलतापूर्वक चलाया है । आप प्रान्‍तीय रैगर महासभा, जयपुर के अध्‍यक्ष रहे ।

(साभार- चन्‍दनमल नवल कृत 'रैगर जाति : इतिहास एवं संस्‍कृति')

 

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श्री छोगालाल कंवरिया

Choga Lal Kanwariya

      आपका जन्‍म प्रतापमल कंवरिया निवासी ब्‍यावर के घर 12 अप्रेल 1922 में हुआ । आपने बी.एस.सी. तथा एल.एल.बी. अजमेर से की । आप डिप्रेस्‍ड क्‍लास एशोसियेशन अजमेर के महांत्री रहे व अखिल भारतीय डिप्रैस्‍ड क्‍लास लीग व कांग्रेस के सदस्‍य रहे । 1952 में आपने राजस्‍थान प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया । 2 वर्ष तक तहसीलदार, 4 वर्ष तक मजिस्‍ट्रेट प्रथम श्रेणी, 5 वर्ष तक विकास अधिकारी, 7 वर्ष तक एस.डी.एम. 1 वर्ष उपनिदेशक स्‍वायत्‍तशासन, 2 वर्ष उपनिदेशक समाज कल्‍याण, 2 वर्ष विकास उपायुक्‍त, 1 वर्ष सैटलमेंट ऑफिसर, 1 वर्ष उप आयुक्‍त वाणिज्‍य (अपील) रहे । सभी पदों पर आपने बहुत ही कुशलतापूर्वक कार्य किया । 1977 में आपने स्‍वैच्छिक सेवा निवृत्ति ले ली और कांग्रेस (ई) के सक्रिय सदस्‍य बन गये । आप अमेजर जिला देहात कांग्रेस (ई) के महामंत्री रहे । 1980 में हुए विधानसभा चुनावों में आप दूदू (सु) क्षेत्र में कांग्रेस (ई) से राजस्‍थान विधानसभा के सदस्‍य चुने गये । 1981 में आप राजस्‍थान राज्‍य टेनेरीज लि. के अध्‍यक्ष रहे । आप राजकीय उपक्रम समिति के 1980 में सदस्‍य रहे । 1983-84 में सरकारी आश्‍वासनों सम्‍बंधी समिति के सदस्‍य रहे । 1983-84 में विशषाधिकार समिति के आप सदस्‍य रहे । चिकित्‍सा एवम् स्‍वास्‍थ्‍य, परिवार कल्‍याण, आयुर्वेद विभागों की संसदीय परापर्श समिति के आप सभापति रहे । 19-07-1981 से 16-10-1982 तक आप राजस्‍थान सरकार में चिकित्‍सा एवम् स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री रहे । आप अखिल भारतीय रैगर महासभा के अध्‍यक्ष भी रहे । आप राजस्‍थान में ही नहीं सम्‍पूर्ण भारत में पहले रैगर हैं जो विधायक से सीधे केबीनेट मंत्री बने । आपके मंत्री बनने से रैगर जाति का नाम ऊँचा हुआ है ।

(साभार- चन्‍दनमल नवल कृत 'रैगर जाति : इतिहास एवं संस्‍कृति')

 

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श्री सुरेन्दपाल रातावाल

Surendra Pal Ratawal

       इतिहास उसका बनता हैं, जो औंरों के दिलों को अपनी सौरभ से सुवासित कर दे । जिसके रोम-रोम में विकास की धारा एवं प्रगतिशील विचारों का वास हो, वो शक्स हर दिल में राज करता है । कर्मठ, मधुरभाषी, निर्भीक, सहासी, देश भक्त एवं भारतीय संस्कृति के मूल्यों में सम्पूर्ण आस्था रखने वाले निर्भिक सहासी नेता श्री सुरेन्द्रपाल रातावाल का जन्म दिल्ली के करोल बाग में राजनैतिक चेतना एवं समाज सेवा की परम्परा वाले प्रतिष्ठित रैगर परिवार में हुआ । उन्हे सामाजिक एवं राजनैतिक जीवन की स्वस्थ्य परम्परा अपने पिता जाने माने समाजसेवी एवं सार्वजनिक जीवन के प्रतिद्ध नेता स्व. बाबू गोपालकृष्ण रातावाल से प्राप्त हुई । आप दिल्ली रैगर समाज के प्रथम व्यक्ति है जो दिल्ली विधान सभा में श्रम, पर्यटन एवं अनुसूचित जाति जन जाति कल्याण विभाग के केबीनेट मंत्री रह कर रैगर समाज को गौरवान्वित किया तथा वर्तमान में करोल बाग विधायक के रुप में रैगर समाज का गौरव बढ़ा रहे है ।
       श्री रातावाल की प्रारंभिक शिक्षा गुरुकुल इन्द्रप्रस्थ में हुई । उच्च शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (बी.ए.) की डिग्री प्राप्त की । छात्र जीवन में ही श्री रातावाल छात्र कल्याण एवं सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हो चुके थे । वर्ष 1972-73 में आप अपनी प्रतिभा एवं व्यक्तित्व गुणों के कारण किरोड़ीमल कॉलेज (दिल्ली विश्व विद्यालय) छात्र संघ के अध्यक्ष पद के लिए चुने जाने वाले प्रथम दलित छात्र नेता थे । पहले आप भारतीय युवा सघ और बाद में भारतीय जनता पार्टी युवा मौर्चा के संयोजक पद की जिम्मेदारी को निभाते हुऐ श्री रातावाल ने करोल बाग क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन, दिल्ली पुलिस एवं नगर निगम से सदैव संघर्ष किया। कई शैक्षणिक संस्थाओं से भी जुड़े रहे । शिक्षा के क्षेत्र में आप सक्रिय रुप से भूमिका निभाई । जनता की नागरिक समस्याओं के निवारण के लिए जूझते हुए आप अनेक बार जेल भी गए । महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों के विरुध भी अनेकों बार प्रदर्शन किये ।
      प्रखर मेघा के धनी एवं विलक्षण व विराट प्रतिभा संपन्न श्री रातावाल वर्ष 1985 से 1989 तक दिल्ली प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के मंत्री रहे तथा 1989 से 1993 तक प्रदेश उपाध्यक्ष रहकर क्षेत्र की समस्याओं के लिए सघर्षशील रहे परिणाम स्वरुप आप सन् 1993 में करोल बाग के विधायक निर्वाचित होकर दिल्ली सरकार में मंत्री रहे । श्री रातावाल ने समाज कल्याण, अनुसूचित जाति/जन जाति कल्याण एवं पर्यटक जैसे जन कल्याण से संबंधित महत्वपूर्ण मंत्रालय का कार्यभार बड़े ही आत्म विश्वास से संभाला । आप मंत्री रहते हुए जनता से पूरी तरह जुड़े रहे व समस्याओं पर पूरा ध्यान दिया । इन्ही सेवाओं को मान्यता देते हुए क्षेत्र की जनता ने एक विशेष नागरिक समारोह में आपको करोल बाग रत्न की उपाधी से सम्मानित किया । आप अपने कार्यकाल में वृद्धावस्था पेंशन में वृद्धि व क्षय रोगियों के आर्थिक सहायता राशि 360 से बढ़ाकर 1200 रुपये वार्षिक की गई । विधवाओं को प्रति वर्ष 10000 हजार सहायता दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया । महिलाओं की उन्नति के लिए महिला विकास निगम की स्थापना। समाज के आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से पिछड़े अनुसूचित जातियों/जनजातियों के लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए श्री रातावाल जी ने कई कल्याणकारी योजनाएं शुरु कर अपनी विशाल उदारता का परिचय दिया है । आपको 14 अप्रेल 2008 को अम्बेडकर जयन्ती के अवसर पर सर्वश्रेष्ठ विधायक का विशेष पुरस्कार से चौधरी प्रेमसिंह ने रातावाल को शॉल ओढ़ाकर सम्मानीत किया और दिल्ली के उपराज्यपाल महामहीम श्री तेजेन्द्र खना ने रातावाल को दिल्ली विधानसभा का मोमेन्टो प्रदान किया ओर लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने दिल्ली विधानसभा का प्रशंसी पत्र एवं एक लाख रुपये का चेक प्रदान किया । दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने बुका देकर आपका सम्मान किया ।
      श्री रातावालजी सन् 2003 पुनः करोल बाग के विधायक निवाचित हुए । आपके सामाजिक कार्य व मानव सेवा समर्पित भावनाओं को देखते दिल्ली विधानसभा में आपको नेता उप पतिपक्ष दिल्ली सरकार चुने गये । जो रैगर समाज के लिए गौरव की बात है । विराट व्यक्तित्व के धनी श्री रातावाल के हंसमुख स्वभान, मिलनसारिता, व उदार हृदय के आज भी हर जन कायल हैं । समाज सेवा, मानव सेवा में रुचि रखने वाले श्री रातावाल की इच्छा राजनैतिक क्षेत्र के माध्यम से हर वर्ग की सहायता व सहयोग के प्रति समर्पित रहना है ।

 

(साभार- गोविन्‍द जाटोलिया : सम्‍पादक ''रैगर ज्‍योति'')

 

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