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संविधान निर्माण और डॉ. भीमराव अम्बेडकर

 

 

Kushal Raigar       15 अगस्त सन् 1947 को भारत विदेशी दासता से मुक्त हुआ और स्वतंत्र राष्ट्र होने पर डाक्टर बाबू राजेन्द प्रसाद को सबसे पहले भारत का राष्ट्रपति बनाया गया । जबकि पंडित जवाहर लाल नेहरू को प्रधानमंत्री पद कि शपथ दिलाई गयी । अपने मंत्री मंडल में सरदार वल्लभ भाई पटेल जो लोह पुरूष के नाम से जाने जाते थे, उन्हें गृह मंत्री बनाया ।

       डॉ. भीमराव अम्बेडकर को पंडित नेहरू ने ऊँचे से ऊँचे पद कानून व विधि मंत्रालय का पद दिया । जबकि डॉ. अम्बेडकर विपक्ष के नेता थे, फिर भी नेहरू जी ने उनका सम्मान किया । स्वतंत्र भारत में वे पहले कानून मंत्री बनाये गये । राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का कहना था कि भारत को नया संविधान बनाना चाहिए क्‍योंकि आजाद भारत को नये सविधान की जरूरत थी, जिसके अनुसार राष्ट्र का शासन चलाया जा सके । इस मुद्दे पर विभिन्न नेताओं के विचार इस प्रकार थे -

1. पंडित जवाहर लाल नेहरू जो प्रधान मंत्री थे, वे चाहते थे किसी अंग्रेज (विदेशी) से संविधान निर्माण कराया जाए जो अनूठा हो ।

2. नेहरू जी ने राष्ट्रपति महात्मा गाँधी से विचार किया, तब उन्‍होंने कहा, तुम्हारे पास देश में सबसे बड़ा कानून एंव संविधान का विशेषज्ञ है, उन्होंने डॉ. भीमराव अम्बेडकर का नाम सुझाया ।

3. जब राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद से नेहरू ने बात की तो उन्‍होंने बताया कि ‘‘डाक्टर भीमराव अम्बेडकर को देश विदेश के सभी संविधानों की जानकारी बहुत अच्छी तरह से है, इसलिए मैं चाहता हूँ कि भारत का नया संविधान डॉ. अम्बेडकर ही बनायें, क्योंकि इन्होंने हर देश में रहकर कानून को अच्छी तरह देखा परखा है । इनसे अच्छा दूसरा व्यक्ति और कोई नहीं, जो कानून का निर्माण कर सके ।’’


       डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर को बताया कि उन्हें संविधान ड्राफ्टिंग कमेटी का अध्‍यक्ष बनाया गया है और कहा कि संविधान बहुत आसान व अच्‍छा बने तब डॉ. भीमराव अम्‍बेडकर ने कहा ''आपकी आज्ञा का पालन होगा, राष्‍ट्रपति महोदय'' !

       संविधान निर्मात्री समिति में सात सदस्‍य थे । उनमें से अचानक एक की मृत्‍यु हो गई । एक सदस्‍य अमेरिका में जाकर रहने लगे और एक सदस्‍य ऐसे जिनको सरकारी काम काज से ही अवकाश नहीं मिल पाया था । इनके अतिरिक्‍त दो सदस्‍य ऐसे थे जो अपना स्‍वास्‍थय ठीक न रहने के कारण वे सदा दिल्‍ली से बाहर रहते थे । इस प्रकार संविधान निर्मात्री समिति के पाँच ऐसे थे जो समिति के कार्यों में सहयोग नहीं दे पाये थे ।

       डॉ. भीमराव अम्‍बेडकर ही एक ऐसे सदस्‍य थे, जिन्‍होंने अपने कंधों पर ही संविधान निर्माण का कार्यभार संभाला था । जब संविधान बन गया तब एक-एक प्रति डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद एवं पंडित जवाहर लाल नेहरू को दी । उन्‍हें संविधान, सरल अच्‍छा लगा । सभी लोग डॉ. भीमराव अम्‍बेडकर की तारीफ करने लगे व बधाईयाँ दी गई । एक सभा का आयोजन किया गया । जिसमें डा. राजेन्‍द्र प्रसाद ने कहा- ''डा. भीमराव अम्‍बेडकर अस्‍वस्‍थ थे, फिर भी बड़ी लगन, मन व मेहनत से काम किया । वे सचमुच बधाई के पात्र हैं । ऐसा संविधान शायद दूसरा कोई नहीं बना पाता, हम इनके आभारी रहेंगे ।''

       पंडित नेहरू ने अपने भाषण में काह ''डा. भीमराव अम्‍बेडकर संविधान के शिल्‍पकार हैं, नया संविधान इनकी देन है । इतिहास में इनका नाम स्‍वर्ण-अक्षरों में लिखा जावेगा । वे महापुरूष हैं । जब तक भारत का नाम रहेगा, तब तक अम्‍बेडकर का नाम भी भारतीय संविधान में हमेशा जुड़ा रहेगा ।''

       26 जनवरी सन् 1950 के दिन यह नया संविधान भारतीय जनता पर लागू किया गया । उस दिन गणतंत्र दिवस का समारोह मनाया गया । वही संविधान आज भी लागू है ।

 

संविधान निर्माण की झलकिया :


1. संविधान प्रारूप समिति की बैठकें 114 दिन तक चली ।

2. संविधान निर्माण में 2 वर्ष 11 माह 18 दिन का समय लगा ।

3. संविधान निर्माण कार्य पर कुल 63 लाख 96 हजार 729 रूपये का खर्च आया ।

4. संविधान के निर्माण कार्य में कुल 7635 सूचनाओं पर चर्चा की गई ।

5. 26 जनवरी 1950 केा भारत का संविधान लागू होने के बाद से अब तक हुए अनेक संशोधनों के बाद भारतीय संविधान में 440 से भी अधिक अनुच्‍छेद व 12 प्रविशिष्‍ट हो चुके हैं ।

 

'' तेरी जय हो भीम महान, बना दिया भारत का संविधान । ''

 

 

raigar writerलेखक

मोहन लाल संवासिया

वरिष्‍ठ उपाध्‍यक्ष, डॉ. भीमराव अम्‍बेडकर संस्‍थान, अजमेर

वरिष्‍ठ कार्मिक अधिकारी (रेल्‍वे) से.नि.

(साभार : भीम ज्‍योति 2011)

 

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