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pointsraigar important point's for life

Bullet जीवनोपयोगी सूक्तियाँ New regar

        पुराणों शास्‍त्रों तथा उपनिषदों में और भी हजारों सूक्तियाँ मनुष्‍य के लिए व लोक कल्‍याण के लिए बनाई गई है । अगर मनुष्‍य इन सूक्तियों का अनुसर करे तो लाभ मोह मद काम क्रोध मत्‍सर से छुटकारा मिल जाता है । आत्‍मा स्‍वच्‍छ निर्मल गंगाजल सी निर्लेप पवित्र बनकर भगवान की प्राप्‍ति का मार्ग पा सकती है । आत्‍मज्ञान की राह से मनुष्‍य मोक्ष की मंजिल पा सकता हैं । इन सूक्तियों में ज्ञान विवेक विश्‍वास श्रद्धा प्रेरणा की रोशनी है, दिव्‍य दृष्टि है जो अंधकार में भटकते हुए प्राणियों को सतमार्ग की ओर ले जाती है । शुभकर्मों में भलाई में परमार्थ में महात्‍माओं के सत्‍संग में आदमी को लगाती है जिससे मन कमल सा प्रफुल्लित रहता है शहर सी मिठास प्राप्‍त हो जाती है वह स्‍वावलम्‍बी हो जाता है । प्रभु पर ही भरोसा रख अपनी कठिनाईयों को दूर करने में समर्थ हो जाता है । देखिये स्‍वावलम्‍बी अपनी कठिनाईयां स्‍वयं दूर करते हैं ।

 

'' महात्‍मा परेण साहसं न कर्तव्‍यंम् '' : आत्‍मवान तेजस्‍वी पुरूष दूसरों के साहस पर निर्भर रहकर कार्य नहीं करते हैं । स्‍नेहिल व्‍यक्ति के शत्रु भी उनके वश में हो जाते हैं सभी उनके वश में हो जाते हैं ।

 

'' उत्‍साहवतां शत्रवो अपिवशी भवंति '' : उत्‍साही व्‍यक्ति के शत्रु भी उसके वश में हो जाते हैं निटठ्ले व्‍यक्ति का जीवन किसी भी लोक में उपयोगी नहीं होता है ।

 

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Bullet दुःखों (व्यसनों) से मुक्ति पाईये !

धर्म विचारों सज्जनों बनो धर्म के दास ।
सच्चे मन से सभी जन त्यागो मदिरा मांस ।।

- स्वामी ज्ञानस्वरूपजी महाराज

प्रिय बंधुओं !

        स्वामी ज्ञानस्वरूपजी महाराज, स्वामी उदारामजी महाराज व स्वामी गोपालरामजी महाराज जैसे संत हमे मार्गदाता व मुक्तिदाता के रूप में मिले हैं । जिनके अथाह प्रयासों से हमारे समाज में कई सुधार हुए है ।
         परन्तु आज हम उनके आदर्शों को आदेशों को भुलकर, गलत रास्ते पर भटक रहें हैं, शराब, बीड़ी, अम्‍बल(अफिम), तम्बाकु, मांस इत्यादि का सेवन तो हर घर व समाज में मुक्त रूप से हो रहा है । यही हमारे दुःखों के मूल कारण है ।
         इन व्यसनों से कैंसर, खांसी, दमा, टीबी, लकवा वगैरह अनेक रोगों ने हमारे घरों में अड्डा जमा रखा है । साथ ही इन व्यसनों से फालतू खर्च भी अपने गले में बांध रखे हैं, जिसके परिणाम स्वरूप हमारी आर्थिक स्थिति खराब होती है तथा इनसे बच्चों पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है ।

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Bullet यात्रा व पर्यटन पर जाने से पहले कुछ सुझाव...

         छुट्टियाँ बिताने के लिये पूरे परिवार के साथ यात्रा में जाने का शौक भला किसे नहीं होता । घूमने जाने के नाम से बच्चे सबसे अधिक रोमांचित होते हैं पर साथ ही साथ बड़े भी उत्साहित रहते हैं । पर अक्सर होता यह है कि लोग बिना किसी पूर्व योजना तथा तैयारी के यात्रा में निकल पड़ते हैं जिससे उन्हें अनेकों कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है । घूमने का सारा मजा किरकिरा हो जाता है । इसलिये अच्छा यही है कि पूरी तरह से सोच-समझ कर यात्रा की पूर्व योजना बनायें और समस्त तैयारियों के साथ ही यात्रा में निकलें ।

 

पूर्व योजना :

◈ जिस स्‍थान पर आप यात्रा करने जा रहे हैं, उसके बारे में पर्यटन विभाग से पूरी जानकारी प्राप्‍त कर लें, ताकि उसी हिसाब से आप कार्यक्रम तय कर सकें ।
◈ जिस जगह आप घूमने जा रहे हैं, उससे संबंधित रोड़ मैप, होटल व धर्मशालाओं के पते आदि अवश्‍य रख लें ताकि आपकी यात्रा सुविधाजनक रहे ।

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Bullet आदर्श दैनिक जीवन के बिन्‍दु : स्‍वास्‍थ्‍य चालीसा

स्‍वस्थ्‍य तन मन ही जीवन का आधार है ।

 

1. जल्दी सोवें और जल्दी उठें । प्रतिदिन सूर्योदय से डेढ़ घंटा पूर्व उठें ।

2. प्रातः उठकर 2-3 गिलास गुनगुना पानी पीयें । गुनगुना पानी में आधा नींबू का रस एवं एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से विशेष लाभ होता है । सुबह खाली पेंट चाय व कॉफी का सेवन न करें ।

3. शौच करते समय दांतों को भींचकर रखने से दांत हिलते नहीं हैं ।

4. प्रातः मुँह में पानी भरकर ठण्डे जल से ऑखों में छींटे मारें । अंगूठे से गले में स्थित तालू की सफाई करने से आंख, कान, नाक, नाक एवं गले के रोग नहीं होते हैं । दाई नासिका व बाई नासिका को प्रेशर देकर साफ करें ।

5. स्नान करने से पूर्व दोनों पैर के अंगूठे में सरसों का शुद्ध तेल मलने से वृद्धावस्था तक नेत्रों की ज्योति कमजोर नहीं होती । प्रातः नंगे पांव हरी घास पर टहले इससे आंखों की रोशनी बढ़ती है सप्ताह में एक दिन पूरी शरीर की सरसों के तेल से मालिश करें, तथा पैर के अंगूठों व पैर के पंजों की दायें हाथ से बायें पंजों की तथा बायें हाथ से दायों पंजों की मालिश करें ।

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Bullet आलस्य ही मानव का सबसे बड़ा दुश्मन है !

         आलस्य मनुष्य का शत्रु है । मनुष्य स्वभाव में आलस्य का भाव स्वाभाविक रूप से रहता है । कर्तव्य कर्मो से जी चुराने का नाम आलस्य है । आलस्य ऐसा दोष है जिससे मनुष्य अपने वर्तमान और भविष्य दोनों को नष्ट कर देता है । आलस्य के कारण ही मनुष्य उन्नति के साधनों को खो देता है । अपने भाग्य को दोष देकर कर्तव्य का पालन न करना आलस्य है । प्राय: मनुष्य आलस्य को विश्राम समझने की भूल करता है ।

 

संत कबीर दास जी ने कहा भी है कि -

‘काल करे सो आज कर, आज करे सो अब, पल में प्रलय हो जायेगी बहुरि करेगा कब ।’

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Bullet आदर्श जीवन दर्शन !

     जीवन की प्रत्येक प्रभात मेरा एक नया जन्म है और मेरा एक दिन मेरे लिए एक जीवन के बराबर है । मैं आज ही वह सब कुछ करूँगा जिसके लिए मेरे परमात्मा ने इस धरती पर मुझे जन्म दिया है । हमारा जीना व दुनिया से जाना दोनों ही गौरवपूर्ण होने चाहिए । कीर्तिर्यस्य स जीवति । कायर व कमजोर होकर नहीं अपितु स्वाभिमान व आत्मज्ञान के साथ जीवन को जियो । भगवान ने महान् कार्य करने हेतु तुम्हारा सृजन किया है । न भागो! न भोगो !! भागने वाले कायर, कमजोर बुज़दिल लोग होते हैं तथा भोगी अविवेकी होते हैं । अतः जागो !
     जीवन एक उत्सव है । जीवन परमात्मा की सबसे बड़ी सौगात है । जीवन परमेश्वर का उत्कृष्ट उपहार है । यह देह देवालय, शिवालय व भगवान का मन्दिर है । यह शरीर अयोध्या है, आत्मा अमर, अजर, नित्य, अनिवाशी, ज्योतिर्मय, तेजोमय, शान्तिमय व तृप्त है । जब तक दम में दम है, व्यक्ति को बेदम नहीं होना चहिए । सुखियों के प्रति मैत्री, दुखियों के प्रति करुणा, सज्जनों से प्रीति एवं दुष्टों की उपेक्षा करते हुए दृढ़ता के साथ ध्येय की ओर आगे बढ़ते रहना, आपको एक दिन सफलता अवश्य मिलेगी व जीवन में सदा प्रसन्नता रहेगी ।

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Bullet जीवन जीने की कला !

      जीवन जीना भी एक कला है अगर हम इस जीवन को किसी Art-Work की तरह जिए तो बहुत सुन्दर जीवन जिया जा सकता है ! वर्तमान में जब चारों ओर अशांति और बेचैनी का माहौल नजर आता है । ऐसे में हर कोई शांति से जीवन जीने की कला सीखना चाहता है ।

      जीवन अमूल्य है ! जीवन एक यात्रा है ! जीवन एक निरंतर कोशिश है ! इसे सफलता पूर्वक जीना भी एक कला है ! जीवन एक अनंत धडकन है ! जीवन बस एक जीवन है ! एक पाने-खोने-पाने के मायाजाल में जीने और उसमे से निकलने की बदिश है ! इसे किस तरह जिया जावे कि एक सुखद, शांत, सद्भावना पूर्ण जीवन जीते हुये, समय की रेत पर हम अपने अमिट पदचिन्ह छोड़ सकें ? यह सतत अन्वेषण का रोचक विषय रहा है ।

      अक्‍सर देखने में आता है कि सुबह से लेकर साम तक बल्कि देर रात तक हमारे मित्र अनर्गल वार्तालाप, अनर्गल सोच विचार, करते रहते है, ऑफिस में सहकर्मियों से, दोस्तों से, बाजार में दुकानदार, घर में परिवार के सदस्यों से मनभेद करते है क्यों ? क्‍या आपने कभी यह सोचा है कि - जीवन का उद्देश्य क्या है ?

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