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Brajesh Hanjavliyaसंचालक की कलम से

स्नेहीजन,

 

         अपने पिछले तीन वर्षों के सेवा काल में कर्तव्य व सेवा बोध की ऋंखला में रैगर समाज की  ''वेबसाईट : www.theraigarsamaj.com '' समाज को समर्पित करते हुए मुझे प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है । प्रसन्नता इस बात की नही कि मैंने अपनी योजनाओं को मूर्त स्वरूप देना प्रारम्भ कर दिया हैं,  समाज में इस वेबसाईट के माध्यम से सम्पर्क व संवाद, सहज व सुगम हो गया है । ''वेबसाईट'' अपने शैशव काल में है, परिपक्वता से पूर्व आपके सुझाव, मार्गदर्शन, पठनीय व दर्शनीय सामग्री की निरन्तर प्राप्ती मुझे संबल प्रदान करेगी ।

         ई-गवर्नेंस, ई-नयूज, ई-मेल, ई-कॉमर्स, ई-ट्रेड, ई-बेंकिंग जब सब कुछ इलेक्ट्रोनिक हो चुका है, तब यह कहना भी अतिश्‍योक्ति नहीं है कि इलेक्ट्रोनिक संसाधन, आज सूचना और सम्पर्क का सशक्त माध्यम बन चुका है । प्रचार-प्रसार में भी इस माध्यम को काम में लिया जा रहा है । किसी समाज की वेब-साईट उसका आईना होती है जिसे व्‍याप्‍त जानकारियों से समाज बंधुओं को सीधे ही प्रभावित करने में सक्षम होती है ।

         आप इसकी उपयोगिता को यूँ समझ सकते हैं कि जब आप किसी प्रोडक्ट की जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तब उस प्रोडक्ट की साईट पर जाकर प्रोडक्ट की गुणवत्ता, उपयुक्तता व अन्य विशेषताओं की पुरी जानकारी प्राप्त कर लेते हैं, बाजार में उसके डीलर अथवा रीटेलर के पास जाने की आवश्‍यकता नहीं होती । घर बैठे ही आवश्‍यक जानकारी प्राप्त हो जाती है । अखिल भारतीय रैगर समाज वेबसाईट www.theraigarsamaj.com से रैगर समाज की समस्‍त जानकारीयां प्राप्त की जा सकती है । इस साईट में किसी स्‍थान विशेष की सूचनाओं को अधिक स्थान नहीं दिया गया है व नहीं दिया जा सकता है क्योंकि यह साईट रैगर समाज के वैश्विक स्तर को ध्यान में रख कर संचालित की जा रही है ।

         अल्प समय में ही ऐसी घटना अथवा समाचार जनित हो जाता है जिसकी सूचना समाज में त्वरित गति से पहुचाना आवश्‍यक लगने लगाता है । यहाँ यह कहने की आवश्‍यकता नही है कि यह केवल इलेक्ट्रोनिक माध्यम से ही संभव है, जो न केवल सस्ता और सुलभ है । रैगर समाज की अनेक रजिस्‍टर्ड संस्‍थाएं लम्‍बें समय से अपना कार्य सुचारू रूप से कर रही है लेकिन उन कार्यो की जानकारी सभी तक सुलभ नहीं हो पाती है । आज कम्प्यूटर का युग है, इन्ही सब बातों का ध्यान रखते हुए रैगर समाज की वेबसाईट बनाई है जिसमें हमने रैगर समाज से संबंधित सभी जानकारियॉ उपलब्ध करवाई है ओर भविष्य में आपके सहयोग से राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक की जानकारियों का भी समावेश करेगे  । रैगर समाज की वेबसाईट की यह प्रारम्भिक अवस्था है अतः आपके सुझाव, सहयोग व मार्गदर्शन से इसे परिपूर्ण एवं प्रहृष्ट बनाना संभव हो सकेगा । आप मुझे अपने सुझाव, सहयोग व मार्गदर्शन दूरभाष अथवा ई-मेल से लाभान्वित करते रहें ।

         समाज से निकटता, पारस्परिक सहयोग और समाज में आस्‍था के प्रति विश्‍वास की भावना निरन्‍तर अपने स्‍वयं के अंदर बलवती होने का अनुभव में दिन प्रति दिन कर रहा हूँ । उसका प्रमाण रैगर समाज की वेबसाईट को समाज को समर्पित कर के सिद्ध हुआ है । उसी विश्‍वास को द्दढता प्रदान करने के लिये और आपकी सहयोग की भावना के आश्‍वासन से इस मंच से रैगर समाज के लिये ही नही बल्कि मानवता के लिये कुछ कर पाने की दिशा में पहले चरण में रैगर समाज की नि:शुल्‍क वैवाहिक वेबसाईट www.raigarsamaj.com शुभारम्‍भ कर महत्त्वाकाँक्षी योजना का प्रयास किया है । आपका तनिक-तनिक सहयोग ही हमारे इस अभियान के लिए संबल होगा । हमारी इन दोनों वेबसाईट के बीज बोये जा चुके हें, आपके स्नेहिल सहयोग से सींचित ये न केवल अंकुरित होंगे बल्कि अपनी खुश्‍बु से समाज को महकायेंगे ।

         हम उन सभी साथियों को धन्यवाद देना चाहते है जिन्होने अपना अमूल्य समय देकर इस कठिन कार्य को सफल बनाने में अपना योगदान दिया है साथ ही आप सभी से निवेदन करते है कि समाज से सम्बन्धित सभी प्रकार की सूचनाऍ नई-नई जानकारियॉ समय-समय पर हमें उपलब्ध करवायें ताकि सूचनाओं को वेबसाईट के जरिये आप सभी तक पहुचाया जा सके ।

         आज चिन्तन का समय आ गया है, उस समाज के प्रति चिन्तन का! जिस समाज के हम अंश हैं, उसके प्रति अपने कर्त्तव्य के निर्वहन का! क्यों कि हमारा व्यक्तित्व, हमारी पहचान उसी समाज से है । मैं समस्त समाज से सूचना प्रौद्योगिकी के इस सशक्त माध्यम ''वेब साईट'' के संदेश से यह आग्रह करना चाहता हूँ कि आज भी हमारे समाज का एक हिस्सा जीवन की मुलभूत सुविधा (जरूरतमंद को चिकित्सा, शिक्षा तथा असहाय व विधवाओं को जीवनयापन की सहायता) से भी वंचित है । हमारा सुख, हमारी संपन्नता उनकी आवश्‍यकताओं की पूर्ती का माध्यम बन सकती है । हो सकता है हमारी थोडी सी मदद उनके डूबती आशाओं को तिनके के सहारे के समान हो जिनके सहारे वे किनारा ढूंढ लें ।

         सुकून क्या है ? यह मैं नही जानता, लेकिन यह सत्य आप भी महसूस करेंगें कि अपने संसाधनों में से अंश मात्र को समाज के लिये न्यौछावर करने पर जो सुखद एहसास होगा, वह निःसन्देह आत्मीय सुकून देने वाला होता है । मानवता व समाज के प्रति हमारी कर्त्तव्य परायणता भी यही बोध कराती है कि हमारा हाथ उठे तो उनकी दुआओं के लिये और झुके तो उनकी सहायता के लिये । फिर हम क्यों हाथ बाँध कर बैठे हैं ?


सिर्फ होने से कुछ नहीं होता

अपने होने का हक अदा कीजै । ।


         मैं स्वयं अथवा मेरा यह संदेश आप तक इस आशा और विश्‍वास के साथ पॅहुच रहा है कि समाज सेवा में सिर्फ मैं और समाज के कुछ बन्धु ही नहीं, आप सभी मेरे साथ हैं । मुझे पूर्ण विश्‍वास है कि यह वेबसाईट समाज को संगठित करने एवं उन्नति की ओर अग्रसर करने में महती योगदान प्रदान करेगी । आइये! इस अभियान में मेरे हाथ से हाथ मिला कर कुछ कदम साथ चलें, कारवॉ बनता चला जायेगा ।

आपका शुभेच्छु,

संचालक


www.theraigarsamaj.com

www. raigarsamaj.com

Brajesh Arya, Brajesh Hanjavliya

ब्रजेश हंजावलिया

मोबाईल नम्बर 9993338909

E-mail : [email protected]

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